अपना दोष छात्रों के सिर मढ़ रहा जैक

जैक एक डिग्री देनेवाला संस्थान हैं. झारखंड गठन के बाद से लेकर आज तक जैक में शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हुई है. इस कारण यहां की पढ़ाई पर बुरा असर पड़ रहा है. छात्र पढ़ाई नहीं होने के कारण कॉलेज कैंपस से दूर होते जा रहे हैं. यह न सिर्फ यहां के छात्रों के लिहाज […]

जैक एक डिग्री देनेवाला संस्थान हैं. झारखंड गठन के बाद से लेकर आज तक जैक में शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हुई है. इस कारण यहां की पढ़ाई पर बुरा असर पड़ रहा है. छात्र पढ़ाई नहीं होने के कारण कॉलेज कैंपस से दूर होते जा रहे हैं. यह न सिर्फ यहां के छात्रों के लिहाज से नुकसानदेह है, बल्कि शैक्षणिक दृष्टिकोण से भी बेहतर नहीं है.
स्थिति यह है कि पढ़ाई के बिना ही जैक दसवीं और बारहवीं की परीक्षा भारी पुलिस बल की मौजूदगी में करवा रहा है. परीक्षा केंद्रों पर मौजूद पुलिस के जवानों को देखने के बाद लगता है कि यहां कोई छात्र परीक्षा देने नहीं, बल्कि अपराधी कोई अपराध करने आया हो. छात्रों के साथ अपराधियों के जैसा व्यवहार किया जाना कहां तक तर्कसंगत है. अपनी कमी को छुपाने के लिए विद्यार्थियों के सिर पर दोष क्यों मढ़ा जा रहा है?
श्वेतांक गर्ग, मेदिनीनगर

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