प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सूट पर फिर से नया विवाद छिड़ गया है. यूं तो खास वस्तुओं की नीलामी कर परोपकार के लिए धन जुटाने का तरीका पहले से चला आ रहा है. वर्षो पहले सुनामी पीड़ितों के लिए भी फिल्म और फैशन जगत की कुछ हस्तियों ने अपने कपड़ों की नीलामी की थी.
लेकिन भावना की सर्वोच्चता, भारतीय परंपरा और गांधीजी को याद करें, तो ऐसा करना वाजिब नहीं लगता.यहां प्रधानमंत्री के नीलाम हुए सूट की भारी कीमत चुकानेवाले धनी सज्जन की मंशा पर भी कोई शक नहीं है, लेकिन बेहतर था कि यह धनराशि प्रधानमंत्री कोष में बिना किसी तामझाम के जमा कर दी जाती. ऐसी बातों से उस पद विशेष की गरिमा पर आंच आती है. यदि यह रकम प्रधानमंत्री कोष में जमा हो जाये, तो उनकी गरिमा बढ़ जायेगी, अन्यथा यह विवाद और गहरायेगा.
विनय भट्ट, हजारीबाग
