नरेंद्र मोदी की अगुवाई में भाजपा सिर्फ केंद्र में ही नहीं, बल्कि कई राज्यों में भी सरकार बनाने में सफल रही है. इसके बावजूद उसके नेताओं के चाल, चरित्र और चेहरा में किसी प्रकार का बदलाव नहीं आया है. धर्म और जाति के नाम पर लोगों में उन्माद पैदा करना और सामाजिक-आर्थिक विखंडन के लिए सांगठनिक तौर पर लोगों को भड़काना उन नेताओं का काम बन गया है.
पार्टी की ओर से संसद और विधानसभाओं में चुन कर गये हुए नेता भी अपने भड़काऊ भाषणों से लोगों को भड़काने में कोई कसर बाकी नहीं रख रहे हैं. यह इसलिए किया जा रहा है, ताकि भाजपा के शासन में लोग असली विकास के मुद्दों से भटक कर इन्हीं विखंडनकारी राजनीति के चक्रव्यूह में फंस कर रह जायें और दोबारा चुनाव आने पर भाजपा को दूसरी पार्टियों पर आरोप मढ़ने का मौका मिल जाये.
बैजनाथ महतो, बोकारो
