आज मानव की सोच बहुत आगे निकल चुका है. दुनिया जितनी आधुनिक होती जा रही है, वह अंदर से उतनी ही कमजोर भी हो रही है.आज जगह-जगह कल कारखाना, ईंट भट्ठे आदि बनाये जा रहा हैं और उनसे निकलनेवाले जहरीले धुएं से पर्यावरण जहरीला हो रहा है. शहरों में नाली के कचरे पानी को नदी, बांध में छोड़ा जा रहा है, फिर उसी पानी को उसी शहर में पीने हेतु सप्लाई भी किया जा रहा है. लोग अपने अन्य कार्यों के लिए भी जंगल के पेड़ों की अंधाधुंध कटाई किये जा रहे हैं.
इससे पर्यावरण बरबाद हो रहा है. दूषित पर्यावरण के कारण विभिन्न प्रकार के संक्रमण और बीमारियां भी बढ़ रही हैं. सरकार अपने स्तर से इस पर ध्यान दे और साथ ही आम नागरिक भी स्वयं के भविष्य की रक्षा हेतु अपनी गलतियों पर अंकुश लगाये, तो पर्यावरण को बचाया जा सकता है.
मुंगेश्वर साहू, सिमडेगा, झारखंड
