देश में आर्थिक सुस्ती के जो कारण हैं, वे किसी से छिपे नहीं हैं. इन कारणों में सबसे चिंताजनक यह तथ्य सामने आया है कि उपभोक्ता खर्च कम हो रहा है.
यह कमी शहरी और ग्रामीण, दोनों क्षेत्रों में हो रही है. इसका मतलब है कि लोग भविष्य को लेकर आशंकित हैं और बचत करना पसंद कर रहे हैं. इससे इनकार नहीं कि बीते दो-तीन महीनों में सरकार एक के बाद एक करीब दो दर्जन कदम उठा चुकी है और इनमें कुछ कदम ऐसे रहे हैं, जिन्हें क्रांतिकारी कहा गया, जैसे कॉर्पोरेट टैक्स दरों में व्यापक कटौती.
इस कटौती से कॉर्पोरेट जगत को प्रोत्साहन तो मिला है, लेकिन हम सब इस तथ्य की अनदेखी नहीं कर सकते कि अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए जो भी कदम उठाये गये हैं, वे आपूर्ति बढ़ानेवाले हैं. ऐसे में सरकार को कुछ ऐसे भी उपाय करने चाहिए, जिससे मांग बढ़े. और मांग तभी बढ़ेगी, जब उपभोक्ता खर्च बढ़ायेंगे. उचित होगा कि अब व्यक्तिगत आयकर दरों में भी कटौती करने के साथ अन्य ऐसे उपाय किये जायें, ताकि लोग खपत बढ़ाने को प्रेरित हों.
डॉ हेमंत कुमार, भागलपुर, िबहार
