भुखमरी इंडेक्स: हमारा आंकड़ा नहीं

भारत एक ऐसा देश है, जहां मनुष्य तो ठीक, पशु-पक्षी, प्राणियों के लिए भी भोजन का प्रबंध सुनिश्चित करने वाली संस्कृति है. यहां केंद्र व राज्य सरकारें जनता तक कम से कम मूल्य में अन्न पहुंचाने का काम करती हैं, फिर उससे चाहे राजतंत्र के कोष पर भी प्रभाव क्यों ना पड़े. भारत जैसे उत्पादन […]

भारत एक ऐसा देश है, जहां मनुष्य तो ठीक, पशु-पक्षी, प्राणियों के लिए भी भोजन का प्रबंध सुनिश्चित करने वाली संस्कृति है. यहां केंद्र व राज्य सरकारें जनता तक कम से कम मूल्य में अन्न पहुंचाने का काम करती हैं, फिर उससे चाहे राजतंत्र के कोष पर भी प्रभाव क्यों ना पड़े.
भारत जैसे उत्पादन संपन्न देश में भुखमरी इंडेक्स को खड़ा करना और इस आधार पर देश की व्यवस्था व विकास का आकलन करना सर्वथा अनुचित है. यह भुखमरी इंडेक्स जिन यूरोपीय देशों में बैठकर बनाये जाते हैं, उनका क्षेत्रफल अमूमन दिल्ली से बड़ा नहीं रहता और साथ ही जनसंख्या दिल्ली से एक चौथाई से भी कम होती है.
इतने छोटे स्तर पर विकसित देश के आधार पर आंकड़ों को देखना व उसकी तुलना भारत जैसे विराट देश से करना सही नहीं. साथ ही पहले हमें यह जानना होगा कि प्रतिवर्ष अक्तूबर में जीएचआइ द्वारा जारी किये जाने वाला हंगर इंडेक्स, वह आंकड़ा बिल्कुल नहीं है जो यह बताता है कि देश में कितने लोग भूखे रहकर काम करते हैं.
इसका आकलन बहुत ही विस्तृत परिपेक्ष्य में होता है. ग्लोबल हंगर इंडेक्स तैयार करने वालों का भी भारत जैसे विकासशील देशों के लिए दृष्टिकोण यह नहीं रहता कि यहां लोग दिन में 2 या 3 बार भोजन कर पाते हैं या नही ? .
मंगलेश सोनी, मध्यप्रदेश

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