तरुण विजय
वरिष्ठ नेता, भाजपा
tarunvijay55555@gmail.com
भारत का प्राचीन गौरव, वैभव और वैश्विक कीर्ति इतनी प्रबल और व्यापक थी कि दुनिया में भारत देखने के लिए सबकी इच्छा रहती थी. कोलंबस भारत की खोज में चला था और अमेरिका पहुंच गया और वहां के मूल निवासियों को इंडियन कह डाला. शताब्दियों बाद वास्तविक भारत से उसी प्राचीन गौरव की पताका लिये एक भारतीय प्रधानमंत्री ने भारत की कीर्ति का जो पराक्रम स्थापित किया, वह अविस्मरणीय इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया.
विदेशों में नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम पहले भी हुए हैं. सभी सफल ही नहीं रहे, बल्कि एक नयी लीक भी बना गये. लेकिन, टेक्सॉस में ‘हाउडी मोदी यानी क्या हाल-चाल हैं मोदी जी’ कार्यक्रम न भूतो न भविष्य की श्रेणी में गिना जायेगा. अभ्यागत देश के प्रमुख नेता किसी भी देश में अपने मूल राष्ट्रवंशियों से मिलें- यह अभी तक बहुत सीमित और प्राय: निजी भेंटों तक ही सिमटा रहता था.
नरेंद्र मोदी ने विदेशों में भारतवंशियों की विराट सभाओं का नया इतिहास रचा. संभवत: विश्व के इतिहास की यह पहली घटना है, जिसमें दो मित्र देशों के सूत्रधार प्रमुखों ने एक साथ मिलकर अतिथि देश के सम्मान में दीवानी हुई जा रही जनसभा को संबोधित किया हो. मोदी और ट्रंप ने वौश्विक कूटनीति की नयी भाषा का अविष्कार कर दिया- बिना इसकी योजना बनाये. अब सब नेता ऐसा करना चाहेंगे. लेकिन वे कितनी भी कोशिश कर लें और जो कुछ भी कर लें, वह हमेशा मोदी की कॉपी ही कहा जायेगा.
अमेरिका में पच्चीस लाख से अधिक भारत मूल के निवासी हैं. वे सभी अमेरिका की सर्वोच्च आय वर्ग में आते हैं- डाॅक्टर, इंजीनियर, सॉफ्टवेयर और इंटरनेट के जादूगर भारतीय ही माने जाते हैं. गूगल, इंटेल, माइक्रोसॉफ्ट सहित दुनिया की अनेक नंबर एक कंपनियों के नंबर एक कार्यकारी संचालक भारतीय हैं.
स्वाभाविक है कि उनका समाज और राजनीति पर भी बड़ा प्रभाव होता ही है. एक बड़े भारतीय अमेरिकी वर्ग (या अमेरिकी भारतीय?) ने ट्रंप का समर्थन किया था. ट्रंप ने उस समय इस्लामिक आतंकवाद से लड़ने और हिंदुओं के प्रति प्रेम और सम्मान का भाव प्रकट किया था. लेकिन बहुत बड़ी संख्या में भारतवंशी रिपब्लिकन भी हैं और अगले वर्ष के राष्ट्रपति चुनावों में यह सभी भारतीय डोनाल्ड ट्रंप के विरुद्ध रिपब्लिकन उम्मीदवार को जिताने में सक्रिय होंगे.
मोदी का जादू ऐसा था कि हाउडी मोदी कार्यक्रम में रिपब्लिकन, डेमोक्रेट का भेद मिट गया, तेलुगु, तमिल, हिंदी और बांग्ला मोदी की भारत गंगा में अवगाहन करने एक साथ आ जुड़े, जबकि अमेरिका में, भारत की तरह न केवल हर हिंदू संप्रदाय के बल्कि उसमें भी प्रांतों के आधार पर संगठन, समितियां और मंदिर भी बनते हैं. ऐसा लगा कि त्रिवेणी पर कुंभ का दृश्य है.
अमेरिका के कैपिटल हिल में भारत संबंधी विषय देखनेवाले एक शिखर अमेरिकी अधिकारी ने मुझे बताया कि मोदी संभवत: अनजाने में अमेरिकी राजनीति में एक नयी शुरुआत कर गये हैं और वह है ‘विराट जनसभाओं की राजनीति’. अमेरिका में बड़ी से बड़ी सभा का अर्थ होता है 500-700 या हजार लोग, वह भी एक हॉल में. बाहर कहीं हजार से तनिक बड़ी सभा हो गयी, तो उसे विराट सभा कहा जाता है. भारत में तो पार्षद की सभा पांच से दस हजार की हो जाती है. संख्या का यह परिमाण अमेरिकी नेताओं के ध्यान में मोदी ने डाला है कि संख्या का बड़ा होना क्या होता है.
अमेरिकी जनता ने अपने जीवन की बड़ी से बड़ी सभा अगर कोई देखी होगी तो वह दसियों साल पहले पोप की थी. अमेरिकी अखबारों ने पोप के बाद अगर मोदी की सभा को सबसे बड़ी माना, तो यह हैरत में डालने या आश्चर्य से अवाक रह जानेवाली घटना से कम नहीं है.
इस घटना का असर और इस पर चर्चाएं आनेवाले कई वर्षों तक होंगी, इसमें कोई संदेह नहीं है. अमेरिका में सरकार किसी की भी रहे- रिपब्लिकन या डेमोक्रेट- उसे अनिवार्यत: इस सभा के बाद भारत के प्रति अपने नजरिये को अत्यंत सम्मानजनक और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने पर विवश होना ही पड़ेगा.
इस जनसभा में हर बात असाधारण थी. ट्रंप ने इस्लामी आतंकवाद का नाम लेते हुए भारत के साथ साझेदारी में इसके खिलाफ लड़ने की बात की. भारत के सेक्यूलर तो जलभुन कर ट्रक के ट्रक बरनोल खत्म कर चुके होंगे, जो गाहे-बगाहे इस्लामी आतंकवादियों के भारत में सबसे बड़े पौरोकार बन गये हैं. दूसरी बात यह हुई कि मोदी ने कश्मीर से अनुच्छेद 370 की समाप्ति का जिक्र करते हुए पाकिस्तान पर तमाचे मार दिये और कहा कि जिनसे अपना मुल्क नहीं संभलता वे बाकी क्या संभालेंगे.
इस सभा का असर अगर वास्तव में समझना है, तो भारतीय सेक्युलर अखबारों को कृपया कुछ दिन न पढ़िए. सही खबर पाकिस्तानी मीडिया और चैनल वाले दे रहे हैं, जहां बहुत बारीकी से मोदी और ट्रंप के एक-एक शब्द का विश्लेषण करते हुए पाकिस्तानी स्यापे जैसा माहौल बनता दिख रहा है.
ट्रंप ने इसी वर्ष भारत आने की भी बात कह दी, यानी अगले दो-तीन महीने में ही. हां! मोदी ने अगली बार ट्रंप सरकार का जबरदस्त नारा अमेरिकियों को दे दिया. लगता है मोदी जी अब अमेरिकियों को हिंदी सिखाकर ही मानेंगे.
कुछ सेक्युलर तबलीगियों और कांग्रेसी नेताओं को एक भारतीय प्रधानमंत्री की भारतीयों के मध्य भारत के हित में की गयी भारत केंद्रित सभा की अभूतपूर्व सफलता नहीं दिखी, बल्कि उन्हें बेचारे रिपब्लिकन अमेरिकियों की िचंता हुई कि मोदी द्वारा ट्रंप के लिए चुनावी नारा देने के बाद यह विदेश के अंदरूनी मामलों में दखल जैसा है. ये बेचारे सहानुभूति के पात्र हैं. जनसभा में भारतीय प्रधानमंत्री ने यदि अगली बार ट्रंप सरकार कहा, तो उसे दखल मानना उस सभा के मूल और जोश के प्रवाह को नकारनेवाला मिस मेयो जैसी गटर इंस्पेक्टरी मानस है.
हाउडी मोदी ने संपूर्ण पृथ्वी पर भारत के शक्तिशाली नेतृत्व की धाक बिठा दी है. भारत का प्रधानमंत्री शिखर वैश्विक नेताओं में एक चमकता सितारा है, यह घोरतम शत्रु भी मानते हैं, भले ही भारत के दुखी सेक्युलर सिर छुपाये सन्नाटा ओढ़े रहें.
यह भारत वह भारत बनता दिख रहा है, जहां आने के लिए दुनियाभर के विद्वान, अन्वेषक, यात्री आते थे और कंगाल मुस्लिम देशों के बर्बर आक्रमणकारी भी उसी समृद्ध भारत के धन से ललचाते थे. पराक्रमी और शत्रुहंता भारत, विजयी और विद्यावान भारत, मित्रों के साथ मित्र और जगत में वेदों और उपनिषदों की वसुधैव कुटुंबकम् वाली भावना फैलानेवाला भारत नरेंद्र मोदी ने टेक्सास में प्रतिष्ठित किया है.
