वामपंथी छात्र संगठनों का गढ़ समझे जाने वाले कोलकाता के जादवपुर विश्वविद्यालय में पिछले दिनों केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो के साथ जो कुछ हुआ, वह स्तब्ध करनेवाला था.
परिसर में आयोजित एक कार्यक्रम के लिए उनके पहुंचते ही छात्रों के एक समूह ने उनके साथ धक्का-मुक्की और मारपीट शुरू कर दी, इससे उनका कपड़ा तक फट गया. मंत्री ने जब उपकुलपति को पुलिस बुलाने को कहा, तो उन्होंने परिसर में पुलिस बुलाने से साफ इनकार कर दिया. मंत्री महोदय पांच घंटे से भी ज्यादा समय तक उपद्रवी छात्रों के बंधक बने रहे. उनके बचाव में स्वयं राज्यपाल को आना पड़ा.
दुख की बात है कि इन दिनों यह विश्वविद्यालय अपनी अकादमिक गतिविधियों के लिए कम और कभी ‘किस ऑफ लव’ अभियान, तो कभी ‘होक कलरव’, तो कभी राजनीतिक हिंसा के लिए सुर्खियां बटोर रहा है. देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय के लिए यह अच्छी बात नहीं.
चंदन कुमार, देवघर
