इच्छाशक्ति की कमी

जहां एक तरफ झारखंड सरकार रोजगार के संदर्भ में नित नये-नये दावे कर रही है और रिकॉर्ड स्तर पर बेरोजगारों को नौकरी देने की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ सच्चाई यह है कि इच्छाशक्ति की कमी के कारण 2016 में झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (जेटेट) उत्तीर्ण अभ्यर्थी आज भी अपनी नियुक्ति का इंतजार कर […]

जहां एक तरफ झारखंड सरकार रोजगार के संदर्भ में नित नये-नये दावे कर रही है और रिकॉर्ड स्तर पर बेरोजगारों को नौकरी देने की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ सच्चाई यह है कि इच्छाशक्ति की कमी के कारण 2016 में झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (जेटेट) उत्तीर्ण अभ्यर्थी आज भी अपनी नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं.

तीन वर्ष बीत जाने के बाद भी सरकार वहीं की वहीं है. इस मामले में पड़ोसी राज्य बिहार झारखंड से आगे है, जिसने 2017 में बिहार शिक्षक पात्रता परीक्षा का आयोजन किया और अब एक लाख से अधिक शिक्षकों की नियुक्ति करने जा रही है.
अमित चौबे बाबू, केतात, पलामू

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