शिक्षक नियुक्ति में संसाधनों का व्यापक दुरुपयोग

बिहार में आगामी शिक्षक नियुक्ति की प्रक्रिया पूर्व की भांति पंचायत, प्रखंड व जिला पर्षद स्तर पर होने जा रही है. ये प्रक्रिया इस तरह से है कि यहां लगभग नौ हजार नियोजन इकाइयां हैं. औसत अभ्यर्थी सैकड़ों जगह आवेदन करके भी नियुक्ति के प्रति संतुष्ट नहीं हो सकते हैं. एक आवेदन में दर्जनों कागजात, […]

बिहार में आगामी शिक्षक नियुक्ति की प्रक्रिया पूर्व की भांति पंचायत, प्रखंड व जिला पर्षद स्तर पर होने जा रही है. ये प्रक्रिया इस तरह से है कि यहां लगभग नौ हजार नियोजन इकाइयां हैं. औसत अभ्यर्थी सैकड़ों जगह आवेदन करके भी नियुक्ति के प्रति संतुष्ट नहीं हो सकते हैं.
एक आवेदन में दर्जनों कागजात, लिफाफा, टिकट आदि लगते हैं. काउंसेलिंग व नियोजन में पुनः कागजात लगेंगे अर्थात एक अभ्यर्थी को हजारों पेपर लग सकते हैं. सैकड़ों नियोजन इकाई में आवेदन होंगे, तो आर्थिक, शारीरिक, मानसिक परेशानी भी होगी. अब इतने बड़े पैमाने पर प्राकृतिक संसाधनों का दुरुपयोग करके हम किस आधार पर संसाधनों की संरक्षण की बात करेंगे. आधुनिक डिजिटल इंडिया के साथ तो ये और भी बड़ा मजाक हो गया है.
सौरभ भारद्वाज, रोसड़ा (समस्तीपुर)

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