हर बात का विरोध जरूरी नहीं

विपक्ष द्वारा सत्तापक्ष के हर बात का विरोध करना एक नकारात्मक संदेश देता है. कांग्रेस हाइकमान को तो यह बात समझ नहीं आ रही, किंतु उनके नेताओं में जयराम रमेश, शशि थरूर और अभिषेक मनु सिंघवी अवश्य ही समझ रहे हैं. जब से नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने हैं, कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने उनके हर […]

विपक्ष द्वारा सत्तापक्ष के हर बात का विरोध करना एक नकारात्मक संदेश देता है. कांग्रेस हाइकमान को तो यह बात समझ नहीं आ रही, किंतु उनके नेताओं में जयराम रमेश, शशि थरूर और अभिषेक मनु सिंघवी अवश्य ही समझ रहे हैं.

जब से नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने हैं, कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने उनके हर सही-गलत कार्य का एकतरफा विरोध किया है. किसी अच्छे कार्य की प्रशंसा एक बार भी नहीं की. नोटबंदी, सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक और तीन तलाक का तो जोरदार विरोध किया ही, साथ ही राष्ट्रहित से जुड़े अतिसंवेदनशील मुद्दे अनुच्छेद 370 का भी जबर्दस्त विरोध कर बैठे.

होना तो यह चाहिए था कि राष्ट्रीय एकता से जुड़े इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर सरकार का साथ देते, लेकिन यहां भी कांग्रेस ने इसे अपनी नाक का सवाल समझा. कांग्रेस का यह विरोध पाकिस्तान का हौसला बढ़ाने का काम करेगा. इससे भारत को बड़ी क्षति हो सकती है.

सतप्रकाश सनोठिया, रोहिणी, दिल्ली

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