क्षमा शर्मा
वरिष्ठ पत्रकार
kshamasharma1@gmail.com
जब से जीवन में मोबाइल फोन का प्रवेश हुआ है, इसके बिना अब एक दिन तो क्या, एक मिनट रहना मुश्किल हो चला है. यही नहीं, चौबीसो घंटे हाथ में फोन रहने से झूठ बोलने, बहाने बनाने, बात करने से बचने के तरीकों में इतना बदलाव आ गया है कि इस पर महाग्रंथ लिखे जा सकते हैं.
लैंडलाइन के जमाने में यह पता नहीं चलता था कि उधर से कौन बोल रहा है, क्योंकि सेव्ड नम्बर दिखने या फोटो दिखने की कोई सुविधा मौजूद नहीं थी. न मिस्ड काल देखने और जवाब में मैसेज भिजवाने की कोई सुविधा थी. लेकिन अब आपसे दूर रहकर भी काल करनेवाला मोबाइल के जरिये आपके सामने रहता है.
इसलिए बहाने भी नये तरह के खोजने पड़ते हैं. अब तो किसका फोन आ रहा है, अगर उसका नंबर आपके फोन में सेव्ड है, तो फौरन पता चल जाता है. इसी तरह जब आप किसी को फोन करते हैं, तो उसे भी पता चल जाता है. ऐसे में यदि कोई आपसे बात नहीं करना चाहता, तो वह फोन को बिजी मोड पर कर सकता है. आप भी ऐसा ही कर सकते हैं.
फोन रिसीव न करने पर कोई मैसेज भी भेज सकता है कि बाद में बात करेगा. कई बार देखकर कि कौन फोन कर रहा है, फोन उठाया नहीं जाता. बाद में कोई पूछे, तो कहा जाता है- अरे, फोन साइलेंट मोड पर था, पता नहीं चल पाया. जब आपका फोन आया, मैं मीटिंग में था, सोचा था कि बाद में फोन करूंगा, करूंगी लेकिन भूल गया, गयी.
या कि अरे आपने फोन किया था, पता ही नहीं चल पाया. वरना तो ऐसा भला कभी हो सकता है कि फोन आये और हम न उठायें. या कि अरे मेरा फोन खराब हो गया था. हो सकता है जब आपने फोन किया हो, वह मेरे पास न होकर ठीक होने गया हो. वैसे भी आपका नंबर फोन में सेव्ड नहीं है.
या कि मैंने फोन किया था, लेकिन आपका फोन बिजी जा रहा था. लेकिन यह बताने पर कि भई, आपका कोई फोन नहीं आया, मिस्ड काल भी दिखाई नहीं दिया. हो सकता है, उस वक्त नेटवर्क काम न कर रहा हो, इसलिए आपको पता न चल पाया हो. वैसे भी नेटवर्क काम न करने का बहाना ऐसा है, जो अकसर काम कर जाता है.
लगता तो यह है कि मोबाइल ने तत्काल मनपसंद व्यक्ति से बात करने की सुविधा को बढ़ाया है, लेकिन इसने आपस में दूरियां भी पैदा की हैं. दूसरे के बोले झूठ का पता भी फौरन चल जाता है. बल्कि जो ज्यादा नजदीकी दिखता है, कई बार वह इतना दूर होता है कि पता नहीं चल पाता. जो जितने मीठे संदेश भेजता है, कई बार वह उतना ही नुकसान पहुंचाने की कोशिश करता है. कई बार तो ऐसा होता है कि रात को मिलकर जन्मदिन मनाया है, मोबाइल से खींची फोटो भेजी गयी हैं, पसंद की गयी हैं.
गले मिला गया है, फेसबुक पर लाइक किया गया है, और अगले दिन आफिस पहुंचने पर उसी व्यक्ति ने टर्मिनेशन लेटर पकड़ा दिया है. यह कहकर कि दोस्ती अपनी जगह, प्रोफेशन या नौकरी की जरूरतें अपनी जगह. दूसरे को नुकसान पहुंचाते हुए भी आप नुकसान करते न दिखें, मोबाइल ने यह अच्छी तरह से सिखा दिया है.
