पर्यावरण संरक्षण की दिशा में पौधारोपण अच्छी पहल

हम और हमारी धरती एक खतरनाक स्थिति की ओर बढ़ रहे हैं. इसी डर ने हमें पौधे लगाने और पानी बचाने की तरफ मोड़ दिया है. बच्चों की ड्राइंग से गायब होते प्राकृतिक दृश्यों को फिर से बनाने की कोशिश में पौधारोपण जैसे कार्यक्रम एक अच्छी पहल है. इसी क्रम में हाइब्रीड और सजावटी पौधों […]

हम और हमारी धरती एक खतरनाक स्थिति की ओर बढ़ रहे हैं. इसी डर ने हमें पौधे लगाने और पानी बचाने की तरफ मोड़ दिया है. बच्चों की ड्राइंग से गायब होते प्राकृतिक दृश्यों को फिर से बनाने की कोशिश में पौधारोपण जैसे कार्यक्रम एक अच्छी पहल है. इसी क्रम में हाइब्रीड और सजावटी पौधों को मुफ्त या उपहार देने का चलन भी जोरों पर है.

शायद पौधे बड़ा होकर उजड़ते जंगलों की जगह लेंगे, जो आनेवाली पीढ़ी के लिए एक खुशखबरी बन सकती है. मगर यहीं से हमारी कोशिशों पर कुछ सवाल भी खड़े होते हैं. क्या सचमुच नये जंगल बसाने के प्रयासों में हम ईमानदार हैं? तुलसी पौधे, सजावटी या पाम जैसे पौधे लगा कर कितने घने जंगल बनाने में कामयाब होंगे?

तरक्की की देन कंक्रीट जंगल के जालों ने फलदार और छायादार पौधों के लिए जगह नहीं छोड़ी है. हमें वह जगह तलाशनी होगी, जहां हरे वृक्षों के घने जंगल की वसीयत आने वाली पीढ़ी के नाम कर सकें.

एमके मिश्रा, मां आनंदमयीनगर, रातू (रांची)

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >