वकीलों व डॉक्टरों की फीस का निर्धारण हो

जनसाधारण से लेकर वीआइपी तक एसडीओ कोर्ट से लेकर सर्वोच्च न्यायालय में न्याय की आस में पहुंचते हैं, जहां रसूखदार लोग तो मोटी फीस देकर अपने मुकदमे की पैरवी के लिए अच्छे वकील रख लेते हैं. परंतु, कानूनी जानकारी नहीं होने के कारण साधारण लोग शीघ्र न्याय पाने की लालसा में ऐसे वकील के फीस […]

जनसाधारण से लेकर वीआइपी तक एसडीओ कोर्ट से लेकर सर्वोच्च न्यायालय में न्याय की आस में पहुंचते हैं, जहां रसूखदार लोग तो मोटी फीस देकर अपने मुकदमे की पैरवी के लिए अच्छे वकील रख लेते हैं.
परंतु, कानूनी जानकारी नहीं होने के कारण साधारण लोग शीघ्र न्याय पाने की लालसा में ऐसे वकील के फीस तभी भर पाते हैं, जब जमीन, घर या औरत के गहने गिरवी रखते हैं या बेचते हैं. इसके बाद भी केस जीतने की कोई गारंटी नहीं रहती.
हालांकि गरीब मुवक्किलों के लिए संविधान ने नि:शुल्क वकील की व्यवस्था की है, किंतु ऐसे पैरवीकार अधिवक्ता की कानूनी जानकारी अल्प ही होती है. मैंने कई कोर्ट के वकीलों के फीस निर्धारण को लेकर ‘बार कौंसिल ऑफ इंडिया’ को पत्र लिखा, किंतु जवाब अब तक पेंडिंग है. सरकार को इस पर ध्यान देने की जरूरत है.
प्रो सदानंद पॉल, नवाबगंज, मनिहारी (कटिहार)

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat khabar digital desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >