एक खबर पढ़ी कि भारत में 2006 से 2016 के बीच दस सालों में 27 करोड़ लोग गरीबी के दायरे से बाहर निकल गये हैं और 44 लोग प्रति मिनट गरीबी से मुक्त होकर अमीर हो रहे हैं. यह जानकारी संयुक्त राष्ट्र संघ और एक अमेरिकी संस्था ऑक्सफोर्ड पोवर्टी एंड ह्यूमन डेवलपमेंट इनीशिएटिव की संयुक्त रिपोर्ट की तरफ से जारी की गयी है.
वास्तविकता यह है कि आज भी इस देश की दो-तिहाई आबादी अनाज, साफ पीने के पानी, दवा, स्कूली शिक्षा व रोजगार के लिए तरस रही है. लगभग 41% गर्भवती कुपोषित और खून की कमी से ग्रस्त हैं. गरीबों के लिए कुछ ठोस काम करने की बजाय आंकड़ों में हेराफेरी करके कथित काल्पनिक गरीबी रेखा के फार्मूले को ही बदल कर भारत को अमीर देशों की श्रेणी में ला देना सिवाय आंकड़ों की बाजीगरी के कुछ नहीं है.
निर्मल कुमार शर्मा, गाजियाबाद
