सड़क हादसों को रोकने का कदम उठाने की जरूरत

बेहतर सड़कें समय की मांग हैं, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि वे भीषण दुर्घटनाओं की गवाह बनती रहे. जिस तरह विभिन्न एक्सप्रेस-वे पर दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं, उसी तरह देश के पर्वतीय इलाकों के रास्तों पर भी. आम तौर पर हर बड़े सड़क हादसे के बाद उन्हें रोकने के लिए उठाये जाने वाले कदमों […]

बेहतर सड़कें समय की मांग हैं, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि वे भीषण दुर्घटनाओं की गवाह बनती रहे. जिस तरह विभिन्न एक्सप्रेस-वे पर दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं, उसी तरह देश के पर्वतीय इलाकों के रास्तों पर भी. आम तौर पर हर बड़े सड़क हादसे के बाद उन्हें रोकने के लिए उठाये जाने वाले कदमों पर चर्चा होती है, लेकिन कुछ समय बाद सब कुछ पहले की ही तरह होता हुआ दिखायी देता है.
यही कारण है कि वर्ष-दर-वर्ष दुर्घटनाओं में मरने वालों अथवा अपंग होने वाले लोगों की बढ़ती संख्या केवल संबंधित परिवारों के लिए ही आफत नहीं बनती, बल्कि वह समाज और देश को भी कमजोर कर रही है.
ऐसा इसलिए क्योंकि सड़क दुर्घटनाओं में मरने वाले ज्यादातर लोग अपने घर-परिवार के कमाऊ सदस्य होते हैं. बेहतर होगा नीति-नियंता यह समझें कि सड़क हादसों को रोकने के लिए कुछ ठोस कदम उठाएं.
डॉ हेमंत कुमार, गोराडीह (भागलपुर)

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