ताजा लोकसभा चुनाव में बड़ी हार के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी शायद अपनी गलतियों को देखते हुए त्यागपत्र पर अड़े हैं, मगर परिवार और पार्टी के कुछ वफादार और प्रिय जन इसके खिलाफ धरने, प्रदर्शन और अनशन आदि से दबाव बनाये हुए हैं जो उचित नहीं है.
क्या पार्टी में और अच्छे नेताओं की कोई कमी है, शायद नहीं. यदि राहुल चाहें तो प्रियंका और सोनिया गांधी आदि बड़े नेताओं से मिलकर किसी को भी यह दायित्व सौंप सकते हैं. कोई इंसान और परिवार कभी बुरा नहीं होता.
कुर्बानी, त्याग भावना और अच्छे कार्यों से ही आगे बढ़ा जा सकता है. इसलिए अब पार्टी को खुलकर और सकारात्मक सोच से ही आगे बढ़ना होगा. अब संभलने और सुधरने का वक़्त है. आशा है पार्टी कुछ सही सोचकर ही अब आगे बढ़ेगी.
वेद मामूरपुर ,नरेला
