शिक्षक अभ्यर्थियों पर लाठीचार्ज निंदनीय

शिक्षक ज्ञान की बदौलत विश्व को प्रकाशित करते आ रहे हैं. यदि पाटलिपुत्र की बात की जाये, तो ऐसे-ऐसे शिक्षक अवतरित हुए हैं, जो संपूर्ण विश्व को एक नयी दिशा व ऊर्जा दिया है, लेकिन वर्तमान में बिहार की शिक्षा व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है. यहां पर न तो अब शिक्षकों का वह सम्मान रह […]

शिक्षक ज्ञान की बदौलत विश्व को प्रकाशित करते आ रहे हैं. यदि पाटलिपुत्र की बात की जाये, तो ऐसे-ऐसे शिक्षक अवतरित हुए हैं, जो संपूर्ण विश्व को एक नयी दिशा व ऊर्जा दिया है, लेकिन वर्तमान में बिहार की शिक्षा व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है. यहां पर न तो अब शिक्षकों का वह सम्मान रह गया है और न ही शिक्षा की व्यवस्था रह गयी है.

नयी शिक्षा नीति लाने वाली केंद्र सरकार कह रही है कि वर्ष 2030 तक विद्यालयों में स्थायी शिक्षकों की बहाली होगी. जबकि, बिहार में नियोजित शिक्षक के पद पर बहाली की मांग करने वाले अभ्यर्थियों की लाठी-डंडे से पिटाई की गयी. इस दौरान महिला अभ्यर्थियों को भी नहीं बख्शा गया. लोकतंत्र में हर व्यक्ति को हक के लिए आवाज उठाने का अधिकार है. ऐसे में दमन की नीति निंदनीय है.

दीपू चौधरी, बल्लीपुर (समस्तीपुर)

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