आयोग की आलोचना

पूर्व राष्ट्रपति भारतरत्न प्रणब मुखर्जी ने हाल में ही एक पुस्तक के विमोचन के अवसर में चुनाव आयोग की तारीफ की. उन्होंने 2019 का चुनाव संपन्न कराने के लिए आयोग की सराहना भी की. यह भी कहा कि प्रथम आयुक्त सुकुमार सेन से लेकर मौजूदा आयुक्त सुनील अरोड़ा तक ने अच्छे काम किये. इन विचारों […]

पूर्व राष्ट्रपति भारतरत्न प्रणब मुखर्जी ने हाल में ही एक पुस्तक के विमोचन के अवसर में चुनाव आयोग की तारीफ की. उन्होंने 2019 का चुनाव संपन्न कराने के लिए आयोग की सराहना भी की. यह भी कहा कि प्रथम आयुक्त सुकुमार सेन से लेकर मौजूदा आयुक्त सुनील अरोड़ा तक ने अच्छे काम किये.

इन विचारों से सभी सहमत होंगे, मगर जब प्रणब दा जब यह कहते हैं – आप मुख्य चुनाव आयुक्त की आलोचना नहीं कर सकते, उनके इस कथन से किसी भी लोकतांत्रिक देश के नागरिक सहमत नहीं हो सकते. आलोचना करना, भिन्न विचार रखना ही तो लोकतंत्र की बुनियाद है. वरना चुनाव आयोगों की आवश्यकता ही नहीं रहेगी.
इस बार आदर्श आचार संहिता लगने के बाद कई नेताओं के बोल बिगड़े हुए थे. कुछ पर कार्रवाई हुई. मगर पंथ प्रधान एवं पार्टी अध्यक्ष को क्लीनचिट दिया गया. इससे विपक्ष या आलोचक और तीन में से एक चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने भी अप्रसन्नता जाहिर की है. ऐसी स्थिति के लिए आयोग की तो आलोचना होनी ही चाहिए.
जंग बहादुर सिंह, गोलपहाड़ी, जमशेदपुर

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