सुप्रीम कोर्ट के फैसले से नियोजित शिक्षक निराश

बिहार के नियोजित शिक्षकों से संबंधित समान काम, समान वेतन पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया, जिससे शिक्षकों में निराशा है. नियमित शिक्षकों से काफी वेतन मिलता है, जिससे घर चलाने में भी परेशानी होती है. इनका कहना है कि इसके लिए उनके बराबर ही काम करते हैं. पर, न्याय नहीं मिला. नियोजित शिक्षकों ने […]

बिहार के नियोजित शिक्षकों से संबंधित समान काम, समान वेतन पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया, जिससे शिक्षकों में निराशा है. नियमित शिक्षकों से काफी वेतन मिलता है, जिससे घर चलाने में भी परेशानी होती है.
इनका कहना है कि इसके लिए उनके बराबर ही काम करते हैं. पर, न्याय नहीं मिला. नियोजित शिक्षकों ने बिहार सरकार से आग्रह किया है कि नियमित और नियोजित शिक्षकों को अलग-अलग विद्यालय में पदस्थापित कर देना चाहिए. विद्यालयों में शिक्षकों का अभाव है.
यहां का पठन-पाठन नियोजित शिक्षकों के भरोसे चलता है. यदि इनका हौसला टूट गया तो बच्चों की पढ़ाई पर इसका बुरा असर पड़ेगा. इसलिए नियोजित शिक्षकों के मान-सम्मान के लिए सरकार को कुछ सोचना चाहिए.
टीपू चौधरी, बल्लीपुर (समस्तीपुर)

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