जलवायु परिवर्तन पर बनना होगा संवेदनशील

राष्ट्र संघ के तत्वावधान में पिछले कई वर्षों से जलवायु परिवर्तन पर सम्मलेन हो रहा है. दुनिया भर के देश वहां मिलते हैं. किताबी भाषण होता है. बढ़ता तापमान और ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन पर घड़ियाली आंसू बहाया जाता है. वापस अपने देश पहुंचकर विकासशील देश कहते हैं कि हमारे पास पैसा नहीं है. […]

राष्ट्र संघ के तत्वावधान में पिछले कई वर्षों से जलवायु परिवर्तन पर सम्मलेन हो रहा है. दुनिया भर के देश वहां मिलते हैं. किताबी भाषण होता है.
बढ़ता तापमान और ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन पर घड़ियाली आंसू बहाया जाता है. वापस अपने देश पहुंचकर विकासशील देश कहते हैं कि हमारे पास पैसा नहीं है. विकसित देश कहते हैं कि धरती को गर्म करने में हमारा कोई योगदान ही नहीं है. इन सब के बीच पिछले दिनों, ब्रेक्जिट के झमेला में फंसे देश ब्रिटेन ने जबरदस्त कदम उठाया.
भले ही पर्यावरणवादियों ने 11 दिनों तक लंदन सहित आस-पास के इलाकों में जमकर धरना प्रदर्शन किया. परिणामस्वरूप वहां की सरकार बाध्य हुई, जलवायु को आपातकाल घोषित करने के लिए. ऐसा करने वाला ब्रिटेन दुनिया का अकेला देश बन गया है. अब अन्य देशों को भी इंग्लैंड के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने की जरुरत है. जलवायु परिवर्तन से समूचा धरती प्रभावित हो रही है.
जंग बहादुर सिंह, गोलपहाड़ी, जमशेदपुर

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