कुछ वर्षों में देश के आदिवासी समाज जल, जंगल और जमीन बचाने के लिए आंदोलन करते नजर आये, वहीं पत्थलगड़ी आंदोलन को लेकर सरकार से सामना भी करना पड़ा. आदिवासी समाज जंगल को अपने पुरखों से मिली हुई विरासत मानकर उसे संरक्षण करते आये हैं.
2019 लोकसभा चुनाव में किसी भी पार्टी की तरफ से आदिवासी समाज की सुरक्षा की बात नहीं कही गयी है. इसी बीच झारखंड के रांची से 50 किलोमीटर दूर स्थित खूंटी जिले में 100 से अधिक पत्थलगड़ी गांव हैं, जहां के लोगों का मानना है कि खूंटी जिले के गांवों में अब भी मूलभूत सुविधाएं नहीं पहुंच पायी हैं. इसके चलते उन सभी गांवों के निवासियों में चुनाव के प्रति उत्साह नहीं है. ऐसे में देखा जाये तो लोकतांत्रिक देश में समान अधिकार होने के बावजूद आदिवासी समाज हाशिये पर नजर आ रहा है.
नितेश कुमार सिन्हा, जानपुल चौक (मोतिहारी)
