लोकसभा चुनाव की बिसात बिछ चुकी है. छह विधानसभा मिलकर एक लोकसभा का निर्माण करता है, जिसमें वोटरों की संख्या 15 लाख से 18 लाख तक होती है. क्या अभ्यर्थी इतने लोगों से मिल सकता है? अगर नहीं तो फिर जीतने के बाद क्या गारंटी है कि वह जन समस्याओं से रूबरू होगा?
भारतीय राजनीति की सबसे बड़ी विडंबना है कि 30-40 साल तक एक ही पार्टी के सिद्धांत पर चलने वाले नेता चुनाव के समय स्वार्थ वश पार्टी बदल लेते हैं और वोटर उन्हें स्वीकार भी कर लेते हैं. वर्तमान में 531 लोकसभा सांसदों में 430 करोड़पति हैं. हमें समझना होगा कि चुनाव जनता की गाढ़ी कमाई से होता है. इसलिए जात-पात, धर्म-समुदाय, अमीर-गरीब को छोड़ कर एक अच्छे प्रत्याशी का चुनाव करें.
आनंद पांडेय,रोसड़ा (समस्तीपुर)
