कोई तो करे चिंता

हर नेता एक-दूसरे को बहस की चुनौती दे रहा है. सवाल है कि प्रमुख राजनीतिज्ञ बहस करने के लिए कितना तैयार हैं? यह भी सही है कि अपने बहस के नाम पर आरोप-प्रत्यारोप ही अधिक होते हैं. आधे-अधूरे तथ्यों और झूठ के सहारे जनता को गुमराह करने की कोशिश की जाती है. जब बड़े नेता […]

हर नेता एक-दूसरे को बहस की चुनौती दे रहा है. सवाल है कि प्रमुख राजनीतिज्ञ बहस करने के लिए कितना तैयार हैं? यह भी सही है कि अपने बहस के नाम पर आरोप-प्रत्यारोप ही अधिक होते हैं. आधे-अधूरे तथ्यों और झूठ के सहारे जनता को गुमराह करने की कोशिश की जाती है.
जब बड़े नेता ऐसा करते हैं, तो छोटे नेता एवं कार्यकर्ता और बेलगाम हो जाते हैं. वे सोशल मीडिया पर भद्दी और ओछी टिप्पणियां करने की होड़ करते दिखते हैं. दुर्भाग्य से यही होड़ टीवी चैनलों में भी दिखने लगी है. मुश्किल यह है कि लोकतंत्र की दुहाई देने और राजनीतिक शुचिता की बातें करने वाले नेता इस रोकने के लिए कुछ भी नहीं कर रहे.
डाॅ हेमंत कुमार, गोराडीह, भागलपुर.

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