मनीषियों की सुक्तियां सिखाती हैं जीने की कला

आजकल नये सरकारी आदेश के अनुसार हर विद्यालय, सरकारी कार्यालयों व संस्थाओं की दीवारों पर सूक्तियां लिखने का आदेश है, जिसका उद्देश्य बेहतर इंसान बनने के लिए प्रेरित करना है. लेकिन, क्या सूक्तियों के लिखे जाने मात्र से ही लोग बेहतर इंसान बन जाएंगे? भारतीय मनीषियों ने कई सूक्तियों के द्वारा हमें जीने की कला […]

आजकल नये सरकारी आदेश के अनुसार हर विद्यालय, सरकारी कार्यालयों व संस्थाओं की दीवारों पर सूक्तियां लिखने का आदेश है, जिसका उद्देश्य बेहतर इंसान बनने के लिए प्रेरित करना है.
लेकिन, क्या सूक्तियों के लिखे जाने मात्र से ही लोग बेहतर इंसान बन जाएंगे? भारतीय मनीषियों ने कई सूक्तियों के द्वारा हमें जीने की कला सिखायी है और हम मनुष्यों की हमेशा से ये प्रवृति रही है कि हम बड़े लोगों के चाल-चलन का अनुसरण करते हैं.
भगवान श्रीराम ने मर्यादा के कारण न सिर्फ वन गये, बल्कि अपनी प्रेयसी का भी परित्याग किया, जिसको लेकर लोग आज भी रामराज की परिकल्पना करते हैं. वहीं, आज के युवा वर्ग फिल्म स्टार, खिलाड़ियों व राजनेताओं का अनुसरण करते हैं. क्या उनका चरित्र हमें प्रेरित कर सकता है?
आनंद पांडेय, रोसड़ा (समस्तीपुर)

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