झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की मुख्य परीक्षा 16 जून को होनेवाली थी, लेकिन अंतिम क्षणों में इसे स्थगित कर दिया गया था. आरक्षण से जुड़े एक पेच के चलते. अब जेपीएससी ने सरकार को लिखा है कि परीक्षा पर लगायी गयी रोक हटायी जाये, क्योंकि उसके द्वारा ली गयी प्रारंभिक परीक्षा (पीटी) में कोई गड़बड़ी नहीं है. प्रारंभिक परीक्षा में रोस्टर नियम लागू नहीं होता है, जब मेन परीक्षा की बात होगी तो वहां रोस्टर नियम लागू किया जायेगा.
जेपीएससी के इस कदम के बावजूद राज्य सरकार कोई निर्णय नहीं ले रही है. इससे 3700 परीक्षार्थियों का भविष्य अधर में है. झारखंड बने 14 साल होने को हैं और इस अवधि में सिर्फ चार बार ही जेपीएससी की पूरी परीक्षा हो पायी है. पांचवीं परीक्षा लटक गयी है. नियमत: हर साल यह परीक्षा होनी चाहिए. लेकिन कभी भ्रष्टाचार, कभी जांच या कभी अन्य कारणों से ये परीक्षाएं नहीं हो पा रही हैं.
इसका खमियाजा छात्रों को भुगतना पड़ रहा है. नियुक्तियां नहीं होने से उन्हें नौकरी नहीं मिल रही. इसी अवधि में बिहार में बीपीएससी की परीक्ष़ाएं समय से हो रही हैं, लोगों को रोजगार मिल रहा है, पर झारखंड में यह सब बंद हैं. राज्य की यह सबसे बड़ी परीक्षा होती है जिसके आधार पर डीएसपी, बीडीओ-सीओ के पद पर भरती होती है. राज्य में अधिकारियों की कमी है, पद खाली पड़े हैं, लेकिन परीक्षाएं नहीं हो रही हैं. जिस मुख्य परीक्षा के लिए 3700 परीक्षार्थियों का चयन हुआ है, उसके पीटी में 72 हजार परीक्षार्थी शामिल हुए थे.
इससे इस परीक्षा का महत्व समझा जा सकता है. आज के युग में अनेक परीक्षाएं आनलाइन हो गयी हैं जिनका दस दिनों में नतीजा आ जाता है. इसके उलट झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं का रिजल्ट महीनों लटका रहता है. इसका असर अगली परीक्षा पर पड़ता है. अब सरकार तुरंत निर्णय ले, ताकि जेपीएससी की परीक्षा जल्द से जल्द हो जाये. इससे अगले साल की परीक्षा समय पर हो जायेगी. सरकार को जो भी नियम बनाना है, बनाये, लागू करे, पर परीक्षा तो समय पर ले. अगर सरकार को बेरोजगारों को नौकरी देनी है तो बगैर विलंब किये उन प्रतियोगी परीक्षाओं का जल्द निष्पादन करे जिनकी या तो परीक्षा नहीं ली गयी है या जिनका रिजल्ट नहीं निकाला गया है.
