आनेवाले चुनाव के लिए सभी राजनीतिक दल अपनी रणनीति तैयार कर रही हैं. आरोप-प्रत्यारोप का दौर अब अपने चरम पर पहुंचने वाला है.
अब वादों और इरादों पर भी जोर दिया जायेगा. इन सब चीजों के बीच पढे-लिखे लोगों और खासकर युवाओं को भी अपनी रणनीति तय कर लेनी चाहिए, कौन-सा उम्मीदवार उम्मीदों पर कितना खरा उतरा है या उतर सकता है. इसका निर्णय कर ही उसे अपना मत देना चाहिए.
हमें बिना जाति-धर्म देखे, सबसे योग्य उम्मीदवार का निर्णय करना है. एक ऐसा पढ़ा-लिखा नेता, जो हमारे कदम से कदम मिला कर चले, जो हमारे विकास के बारे में सोचे, जो हमारे दुख-दर्द को समझे. जरूरी है कि इस बार राजनीतिक दलों के साथ-साथ रणनीति हम मतदाता भी बनाएं और अपनी सरकार बनाएं.
उत्सव रंजन, नीमा, हजारीबाग
