सकारात्मक राजनीति की जरूरत

भारत के वैश्विक मान को धूमिल करने में हमारे नेताओं के कार्यकलाप भी जिम्मेदार हैं, जो सदन के भीतर और बाहर वो काम करते आये हैं जो विश्व भर में निंदित है. चाहे माइक फेंक कर मारने की बात हो, शोर-शराबे के बीच बिल पास करने की बात हो या अभद्र भाषा का प्रयोगहो. इससे […]

भारत के वैश्विक मान को धूमिल करने में हमारे नेताओं के कार्यकलाप भी जिम्मेदार हैं, जो सदन के भीतर और बाहर वो काम करते आये हैं जो विश्व भर में निंदित है. चाहे माइक फेंक कर मारने की बात हो, शोर-शराबे के बीच बिल पास करने की बात हो या अभद्र भाषा का प्रयोगहो. इससे भारत की गलत छवि बनती है और ऐसा लगता है जैसे हमारे जनप्रतिनिधि राष्ट्रहित में कभी गंभीर नहीं होते और राजनीति को व्यवसाय मानते हों.
16वीं लोकसभा के सदस्यों से यह अपील और आशा है कि वे सदन की कार्यवाही के दौरान समर्पित और गरिमामय आदर्श स्थापित करेंगे और देश के विकास को प्राथमिकता देते हुए राजनैतिक संकीर्णता का प्रदर्शन नहीं करेंगे. आज देश को अपनी विकास-गति बढ़ाने के लिए ईमानदार प्रयास की जरूरत है, जिसका दायित्व जनता ने सांसदों को दिया है.
मनोज आजिज, जमशेदपुर

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