प्रियंका पूर्वी उत्तर प्रदेश में नरेंद्र मोदी और योगी आदित्यनाथ का मुकाबला करेंगी, लेकिन यह देखना बाकी है कि वे राज्य के बाकी हिस्सों या देश भर में पार्टी के लिए कितना प्रचार करती हैं. हालांकि अब जबकि उन्होंने सक्रिय राजनीति में उतरते हुए एक बड़ी छलांग लगायी हैं. ऐसे में लगता नहीं कि वे एक बार फिर चुनाव निबटने के बाद परदे के पीछे जाकर बैठ जायेंगी.
इससे पार्टी की कार्यशैली को लेकर भी कई सवाल उठ सकते हैं- मसलन, पार्टी में उनकी भूमिका क्या होगी और गांधी परिवार के तीन सदस्यों के बीच शक्ति का बंटवारा किस तरह होगा. हालांकि नेहरू-गांधी परिवार की इस भाई-बहन की जोड़ी के मध्य बेहतर समझ है, लेकिन इस संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता कि दोनों में हर कोई एक शक्ति केंद्र बनना चाहे। प्रियंका राहुल से उम्र में छोटी जरूर हैं, लेकिन उनका व्यक्तित्व कहीं ज्यादा मजबूत है.
डाॅ हेमंत कुमार, गोराडीह (भागलपुर)
