नैतिक शिक्षा की आवश्यकता

आज हमारा देश कई समस्याओं से जूझ रहा है, जिनमें से एक भ्रष्टाचार है. भ्रष्टाचार हमारे देश में चर्चा तथा आंदोलन का एक प्रमुख विषय रहा है. राजनीति से लेकर नौकरशाही तक भ्रष्टाचार व्यापक रूप से फैला हुआ है. हमारे देश में सबसे ज्यादा भ्रष्ट पढ़े-लिखे तथा शिक्षित लोग हैं जो सरकारी तथा गैर-सरकारी पदों […]

आज हमारा देश कई समस्याओं से जूझ रहा है, जिनमें से एक भ्रष्टाचार है. भ्रष्टाचार हमारे देश में चर्चा तथा आंदोलन का एक प्रमुख विषय रहा है. राजनीति से लेकर नौकरशाही तक भ्रष्टाचार व्यापक रूप से फैला हुआ है. हमारे देश में सबसे ज्यादा भ्रष्ट पढ़े-लिखे तथा शिक्षित लोग हैं जो सरकारी तथा गैर-सरकारी पदों पर बैठ कर उसका दुरुपयोग करते हैं. आज इन लोगों को नैतिकता का पाठ पढ़ाने की अत्यंत आवश्यकता है.

मानव संसाधन तथा विकास मंत्रालय द्वारा भ्रष्टाचार की रोकथाम के विषय को कॉलेजों के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना निश्चित रूप से एक साकारात्मक कदम है. हमारे देश में बलात्कार तथा छेड़खानी जैसी घटनाएं भी लगातार बढ़ती जा रही हैं. जब निर्भया या बदायूं जैसी घटनाएं होती हैं तो यह चर्चा का विषय बन जाती है लेकिनसमय के साथ ये चर्चाएं गौण हो जाती हैं. इन घटनाओं को रोकने के लिए हमेशा पुलिस और सरकार को दोषी ठहराया जाता है लेकिन उस विकृत मानसिकता की चर्चा कोई नहीं करता जो इस तरह की घिनौनी घटनाओं के लिये जिम्मेदार होती है.

यदि किसी नाबालिग का उसी के परिवार के किसी सदस्य द्वारा यौन उत्पीड़न किया जाता है तो क्या इसके लिए भी पुलिस और सरकार जिम्मेदार है? जी नहीं. ऐसी मानसिकता को पनपने से रोकने के लिए लोगों को नैतिकता तथा लैंगिक संवेदनशीलता का पाठ पढ़ाने की आवश्यकता है. मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय द्वारा नैतिक शिक्षा पर जोर देने के प्रयास को एक सराहनीय कदम कहा जा सकता है. यदि माध्यमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक छात्रों को व्यावहारिक रूप से नैतिकता का पाठ पढ़ाया जाय तो निश्चित रूप से हमें समाज में एक बदलाव देखने को मिलेगा.

आकाश कुमार, ई-मेल से

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >