कुछ समय से सांसद सदन के अंदर काम करने से ज्यादा संसद परिसर में धरना-प्रदर्शन की मुद्रा में दिखने लगे हैं. अगर संसद जाकर सड़क की राजनीति करनी है, तो फिर वहां हाजिरी देने का मतलब ही क्या है? संसद में काम कम और हंगामा अधिक होने के लिए जितने जिम्मेदार सांसद हैं, उससे अधिक राजनीतिक दलों के नेतृत्व हैं. आमतौर पर अपने नेता और नेतृत्व के इशारे पर ही सांसद हंगामा करते हैं.
एक समस्या यह भी है कि संसद में अपने दायित्वों का सही तरह निर्वाह करने वाले सांसदों से अधिक चर्चा उन्हें मिलने लगी है, जो येन-केन-प्रकारेण सदन की कार्यवाही में खलल डालते हैं. बेहतर होगा कि सभी दल गंभीरता से विचार करें कि संसद में महत्वपूर्ण मुद्दों पर सार्थक बहस कैसे हो? अगर संसद में इसी तरह हंगामा होता रहा, तो उसकी महत्ता कायम रहना कठिन होगा.
डॉ हेमंत कुमार, भागलपुर
