प्रिय मित्र, साल 2019

मुकुल श्रीवास्तव टिप्पणीकार sri.mukul@gmail.com आखिर तुम आ ही गये और मेरे जाने का वक्त आ गया, पर चलने से पहले कुछ बातें तुम से बांट लूं. वैसे तुम आते ही व्यस्त हो जाओगे खुशियां मनाने में. तो मैंने सोचा चलने से पहले एक चिट्ठी तुम्हारे लिए लिख दूं. मेरे मित्र, मैंने एक साल में जीवन […]

मुकुल श्रीवास्तव
टिप्पणीकार
sri.mukul@gmail.com
आखिर तुम आ ही गये और मेरे जाने का वक्त आ गया, पर चलने से पहले कुछ बातें तुम से बांट लूं. वैसे तुम आते ही व्यस्त हो जाओगे खुशियां मनाने में.
तो मैंने सोचा चलने से पहले एक चिट्ठी तुम्हारे लिए लिख दूं. मेरे मित्र, मैंने एक साल में जीवन के कई रंग देखे, कुछ अच्छे थे कुछ बुरे. कई जगह मुझे इस बात का पछतावा हुआ कि मैं बेहतर कर सकता था, पर चीजें देर से समझ में आयीं. जब भी हम कोई नया काम संभालते हैं, तो लोगों को बहुत उम्मीदें रहती हैं.
हमें लगता है कि ये खुशियां ऐसी ही रहेंगी, पर वास्तव में ऐसा होता नहीं. जब मैं आया था, तो लोगों ने खूब खुशियां मनायीं और मैंने भी इनका खूब आनंद लिया. लेकिन, धीरे-धीरे लोगों की अपेक्षाएं बढ़ने लगीं. मैं कुछ पूरी कर पाया और कुछ नहीं. विकास के मुद्दे पर कुछ लोग जागरूक हुए. अब जो काम मैंने शुरू किया, उसे ही तुम्हें आगे बढ़ाना है.
तुम जब आओगे, तो खूब खुशियां मनाओगे. पर यह मत भूलना कि यह समय तुम्हारे लिए अवसर भी लायेगा और चुनौतियां भी. अगर चुनौतियाें को अवसर में बदल लोगे, तो तुम्हारी जय होगी. आखिर यह चुनावी साल है, उस लिहाज से संवेदनशील भी है. शुरू में मुझे लगता था कि मैं सही हूं और जो बड़े लोग कहते हैं, वे सही नहीं हैं या शायद वे मुझे समझते नहीं. पर आखिरी वक्त में मुझे ऐसा लग रहा है कि मैं गलत था. जो भी मुझसे बड़े मेरे लिए कहते थे, वे सही थे. तब मेरे पास अनुभवों को खजाना नहीं था कि मैं उनकी बातों को समझ सकूं.
हो सकता तुम्हें मेरी बातें समझ में न आ रही हों या बुरी लग रही हों, पर मेरे दोस्त, जिंदगी कुछ अच्छा ही सिखाती है. अब तुम्हारे ऊपर है कि तुम मेरी बात को ठोकर खाकर समझो या पहले से ही जान लो. मैंने अपनी जिंदगी में यही सीखा है.
लोगों को साथ लेकर चलो, सबकी सुनो. इस छोटे से जीवन में मुझे लगता है कम-से-कम यह काम तो हम कर ही सकते हैं कि खुशियों को सर पर न चढ़ने दें. आखिर एक दिन तुम्हें भी जाना है, तो सकारात्मक सोच के साथ काम करोगे, तो ही ठीक रहेगा. दुनिया बहुत तेजी से बदल रही है. कल मैं नया था, आज तुम नये हो. तुम्हारे साथ भी ऐसा ही होगा. इसलिए अपने आनेवाले कल को सोचकर अपना आज मत खराब करना. अगर कुछ गलत हो भी जाये, तो उसे इस सोच के साथ स्वीकार करना कि चलो कुछ तजुर्बा ही हुआ, जिसे तुम आगे आनेवाली पीढ़ी को बता सको.
हमारी सभ्यता इसी तरह विकसित हुई है. तुम आ रहे हो और मैं जा रहा हूं. इस आने-जाने की प्रक्रिया को याद रखना, जो आया है वह जायेगा. तुम्हें पत्र लिखना तो सिर्फ एक बहाना था, ताकि मैं तुमसे अपनी बात कह सकूं. अपना ख्याल रखना और लोगों की सुनते रहना. अपनी बात भी रखते चलना. इस उम्मीद के साथ मैं चलता हूं कि आनेवाले समय में तुम खुद भी खुश रहोगे और लोगों को भी खुश रखोगे.
अलविदा, बहुत सारी शुभकामनाओं के साथ!
तुम्हारा दोस्त, साल 2018

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