सुरेश कांत
वरिष्ठ व्यंग्यकार
drsureshkant@gmail.com
पिछले दिनों अमेरिका के डॉलर और भारत के रुपये के बीच मुलाकात हुई. दोनों की बॉडी-लैंग्वेज उनकी हालत बता रही थी. डॉलर ने रुपये से हाथ मिलाते हुए भी उसका हाथ जोर से दबाकर अपनी ताकत का एहसास करा दिया, जबकि रुपया उससे नजरें मिलाने से भी बचता रहा.
बातचीत शुरू करते हुए डॉलर ने रुपये से पूछा- हाय डियर इंडियन रुपी, हाउ आर यू? आई एम डॉलर फ्रॉम यूएसए! तो रुपये ने जवाब दिया- हां, हां, महाशय, आपको कौन नहीं जानता? पर यह क्या डॉलर दादा, आप हाय क्यों कर रहे हैं? हाय तो हमारी निकल रही है आपकी बदौलत. आपने हमें कहीं का नहीं रखा. ‘सवा लाख से एक लड़ाऊं’ की तर्ज पर आप तो अकेले हम जैसे अस्सी रुपयों के बराबर होने जा रहे हैं.
डॉलर ने हंसते हुए जवाब दिया कि यह तुम्हारी हिंदी की ‘हाय’ नहीं है मिस्टर रूपी, यह तो हमारी ‘हैलो’ का ही नया रूप है. हाय तो गरीब की लगा करती है, यह तुम्हीं लोगों का कहना है, और गरीब तुम्हारे ही यहां रहते हैं.
पता नहीं कैसे, गरीब की उस हाय से लोहा भी भस्म हो जाता है! कैसी अजीब-अजीब बातें करते हो तुम लोग भी! खैर, हमारी ‘हाय’ और तुम्हारी ‘हाय’ में फर्क है. वैसे यार, नकलची तुम खूब हो. न केवल कुछ इंडियंस हमारी इस ‘हाय’ को भी ले उड़े हैं और अपनी ‘नमस्ते’ भूल पूरी निर्लज्जता से इसका ही इस्तेमाल करने लगे हैं, बल्कि कुछ तो ‘हाय’ से ‘हुक्कू’ तक भी जा पहुंचे हैं. तुम्हारी ही किसी फिल्म का गाना है न यह, कि हाय-हुक्कू, हाय-हुक्कू, हाय-हाय, इक लड़की मेरे सामने मेरा दिल लिये जाये… खैर छोड़ो, यह बताओ, यह क्या हाल बना रखा है तुमने? कुछ लेते क्यों नहीं?
रुपया बोला कि अब क्या बताएं आपको, कभी हमारी भी बड़ी शान थी. रानी विक्टोरिया ने हमें चांदी का कलदार बनाया था. जब हम बजते थे, तो ‘ठन्न’ से आवाज आती थी. फिर हम गिलट के बने और आज स्टील के हैं. कांग्रेस के राज में हमारी हालत यह हो गयी थी कि बकौल विपक्षी, पता नहीं चलता था कि प्रधानमंत्री की प्रतिष्ठा ज्यादा गिर रही है कि रुपये की.
पर यही कहकर सत्ता में आयी भाजपा से उम्मीद थी कि वह न केवल हमें गिरने से रोकेगी, बल्कि उठने में सहायता भी करेगी. लेकिन, जब उन्हें यह बताया जाता है कि रुपया तो गिरते-गिरते काफी नीचे तक जा पहुंचा है, तो वे उलटे भड़क जाते हैं और असली मुद्दे को छोड़कर नैतिकता-अनैतिकता की बात करने लगते हैं. उधर आप लोगों का रवैया भी कोई कम सख्त नहीं…
डॉलर ने दो-टूक कहा- देखो, हमारा रवैया तो ऐसा ही रहेगा, आखिर हम ‘हार्ड’ करेंसी जो हैं. हमने रूस के रूबल की हड्डी तोड़ दी थी. आज सारी दुनिया पर डॉलर राज करता है. लोग यों ही नहीं कहते कि ‘गॉड इज पावरफुल बट डॉलर इज ऑलमाइटी’ यानी ईश्वर शक्तिमान है पर डॉलर सर्वशक्तिमान है.कुछ और गुफ्तगू करने के बाद डॉलर ने रुपये से यह कहते हुए विदा ली कि ओके मिस्टर रुपी, विश यू स्पीडी रिकवरी, बेस्ट ऑफ लक!
