किसानों की कर्ज माफी की घोषणा पहले भी कुछ राज्यों में की जा चुकी है. इनमें भाजपा शासित राज्य भी शामिल हैं. एक राजनीतिक दल को अतीत की गलतियों से जरूर सबक लेना चाहिए.
कम-से-कम कांग्रेस को तो यह अच्छी तरह पता होना चाहिए कि मनमोहन सरकार के समय कर्ज माफी की घोषणा का क्या नतीजा रहा? वह इससे भी अनभिज्ञ नहीं हो सकती कि उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र के किसान कर्ज माफी के बाद भी परेशानी से उबरे नहीं. हजारों करोड़ के कर्ज के माफ होने के बाद भी किसान नाराज हैं. सच्चाई यह भी है कि किसान की कर्ज माफी मुफ्तखोरी की संस्कृति को बल देने के साथ ही बैंकों का भी बेड़ा गर्क कर रही है.
तीन राज्यों में विजय हासिल करने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी यह कह दिया कि कर्ज माफी किसानों की समस्या का सही समाधान नहीं, क्योंकि केवल सच की स्वीकारोक्ति किसी गंभीर मसले का हल नहीं हो सकती.
डाॅ हेमंत कुमार, भागलपुर
