राफेल विमान मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को सत्तापक्ष की जीत के रूप में देखा जाने लगा है. निश्चय ही न्यायालय से जब न्याय होता है, तो किसी की जीत और किसी की हार होती है, मगर सरकार का फिर से भूल सुधार की अर्जी के साथ अदालत के दरवाजे खटखटाने की कार्रवाई ने देश को दुविधा में डाल दिया है.
वहीं, विपक्ष ने पतंग की छिटकती डोर को फिर से पकड़ लिया है. मामला सबसे बड़ी अदालत की भूल का है, जिसने पूरे फैसले को एकतरफा कर दिया है, मगर सवाल यह है कि क्या सुप्रीम कोर्ट को भी इस बड़े फैसले में गफलत हो सकती है?
कहीं फैसले की जल्दबाजी ही सारी गड़बड़ी की वजह तो नही? या कि कोर्ट को जानबूझ कर गुमराह करने की कोशिश की गयी है? सवाल तो देश की दो बड़ी हस्तियों की उस मुलाकात पर भी उठेंगे, जो फैसले से पहले हुई थी. एक गलत फैसला देश को बेशक पेशोपेश में डाल रखा है कि शिकायत गलत है या फैसला?
एमके मिश्रा, रातू, रांची
