मानवता व कानून को काला झंडा

बुलंदशहर में हुई घटना ने संपूर्ण देश को आहत किया है. भीड़ द्वारा एक इंस्पेक्टर की हत्या करना मानवता व कानून को काला झंडा दिखाना ही है. इस घटनाक्रम में एक युवक की भी मौत हुई है. देश में जब हमारी हिफाजत करने वाले ही खुद हिफाजत से नहीं हैं, तो ऐसे में आम नागरिकों […]

बुलंदशहर में हुई घटना ने संपूर्ण देश को आहत किया है. भीड़ द्वारा एक इंस्पेक्टर की हत्या करना मानवता व कानून को काला झंडा दिखाना ही है. इस घटनाक्रम में एक युवक की भी मौत हुई है.
देश में जब हमारी हिफाजत करने वाले ही खुद हिफाजत से नहीं हैं, तो ऐसे में आम नागरिकों की सुरक्षा की क्या कल्पना की जा सकती है. कुछ सालों से ऐसे दृश्य देखने को मिल रहे हैं जिससे लगता तो यही है कि कानून कहीं न कहीं आज हाशिए पर है और इसके जिम्मेदार वही लोग हैं, जो हमारे जिम्मेदार बनते हैं.अगर इस प्रकार से भीड़ खुद से खुदा बनने लगे, तो इनके विरुद्ध एक मजबूत कानून बनाने की आवश्यकता है ताकि कोई भी व्यक्ति या संस्था कानून से बड़ा न बन सके.
शादाब अफजल, चंद्रपुरा

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