#मी टू न समाज का आइना

मी टू कैंपेन हमारे समाज में प्रतिष्ठित लोगों की दोहरी जिंदगी को दिखाता है. जरूरी नहीं कि सारे आरोप सही हों. जो लोग आरोपों को खारिज कर रहे हैं, उन्हें समझना चाहिए कि सभी आरोप झूठे नहीं हो सकते. यौन शोषण ऐसा मुद्दा है, जिस पर बहुत कम ही महिलाएं बोलती हैं. अगर महिलाएं सेलिब्रिटी […]

मी टू कैंपेन हमारे समाज में प्रतिष्ठित लोगों की दोहरी जिंदगी को दिखाता है. जरूरी नहीं कि सारे आरोप सही हों. जो लोग आरोपों को खारिज कर रहे हैं, उन्हें समझना चाहिए कि सभी आरोप झूठे नहीं हो सकते. यौन शोषण ऐसा मुद्दा है, जिस पर बहुत कम ही महिलाएं बोलती हैं.
अगर महिलाएं सेलिब्रिटी हों और पुरुष रसूखदार, तब तो और नहीं. उन महिलाओं की हिम्मत की दाद तो देनी ही होगी, जिन्होंने देर से ही सही, पर आवाज तो उठायी.
इस परिस्थिति के लिए काफी हद तक हमारी मानसिकता भी जिम्मेदार है. बचपन से लड़कियों को यह समझाया जाता है कि उनकी इज्जत उनकी जान से भी बढ़कर है. लोक-लाज का भय दिखाकर उन्हें चुप रहने को कहा जाता है. जब तक हमारी सोच विकसित नहीं होगी, ऐसी घटनाओं पर आश्चर्य करना फिजूल है.
सीमा साही, बोकारो

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