इतनी कड़ी प्रशासन प्रणाली होने के बावजूद आज देश में मानव तस्करी का मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है. पिछले कुछ दिनों से झारखंड की युवतियों का दूसरे राज्य में कैद पाया जाना हमारे समक्ष एक प्रश्न पैदा कर रहा है कि क्या यह सचमुच उसी भारत वर्ष की घटना है, जहां बड़े जोर-शोर से महिला सशक्तीकरण पर जोर दिया जा रहा है? इस घटना ने मानव समाज, लोकतांत्रिक शासन प्रणाली, महिला सशक्तीकरण विभाग, स्वयं मानवता और विश्वास को कटघरे में खड़ा कर दिया है.
क्या इसी का नाम विश्वास है कि हम किसी भी लड़की को काम के बहाने दूसरे राज्य ले जाकर बेच देते हैं? इस तरह की घटनाओं की खबरें अक्सर समाचारपत्रों में आती हैं, लेकिन आज भी समस्या जस-की-तस है. जल्द-से-जल्द लोकतांत्रिक शासन प्रणाली के सहयोग से बंद कमरे से उन लड़कियों को छुड़वाया जाए, इन्हें स्वतंत्र होकर जीने दिया जाये.
लिटिल कुमार,जवाहर नवोदय विद्यालय, हंसडीहा ,दुमका
