दो तरफा दबाव में सरकार

दलित आंदोलनों और विभिन्न विपक्षी दलों के साथ-साथ सत्ता पक्ष के कुछ सांसदों के विरोध के बाद आनन-फानन में सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को बदलने के लिए संविधान संशोधन किया तथा कानून को पुनः यथावत कर दिया. सरकार के ही कुछ सांसद इसके समर्थन में उतर आये हैं. फिर आगे क्या होता है […]

दलित आंदोलनों और विभिन्न विपक्षी दलों के साथ-साथ सत्ता पक्ष के कुछ सांसदों के विरोध के बाद आनन-फानन में सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को बदलने के लिए संविधान संशोधन किया तथा कानून को पुनः यथावत कर दिया. सरकार के ही कुछ सांसद इसके समर्थन में उतर आये हैं.
फिर आगे क्या होता है यह तो सरकार ही जाने, लेकिन भाजपा अब दोतरफा दबाव में घिर गयी है. एक तरफ गिरफ्तार पांच वामपंथी विचारकों का मामला और दूसरी तरफ कुछ वर्गों की अनुसूचित जाति जनजाति कानून के विरोध में आंदोलन. वैसे यह बात समझना काफी कठिन है कि यही भारतीय जनता पार्टी की सरकार राम मंदिर कानून को लेकर सरकार सर्वोच्च न्यायालय पर निर्भर है जबकि अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति कानून के बारे में उसी सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को बदल दिया.
सिद्धांत मिश्रा, पूरनपुर, उत्तर प्रदेश

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