प्राथमिक शिक्षा और रोजगार

हमलोग आमतौर पर रोजगार उच्च शिक्षा पाने के बाद पाते हैं, पर सोचने वाली बात यह है कि भारत सबसे ज्यादा बेरोजगारों का देश बन गया हैं. बच्चों की उच्च शिक्षा को लेकर तो हम काफी चिंतित रहते हैं और कड़ी मशक्कत करते हैं, पर नींव यानी प्राथमिक शिक्षा को लेकर हम उतना चिंतित नहीं […]

हमलोग आमतौर पर रोजगार उच्च शिक्षा पाने के बाद पाते हैं, पर सोचने वाली बात यह है कि भारत सबसे ज्यादा बेरोजगारों का देश बन गया हैं.
बच्चों की उच्च शिक्षा को लेकर तो हम काफी चिंतित रहते हैं और कड़ी मशक्कत करते हैं, पर नींव यानी प्राथमिक शिक्षा को लेकर हम उतना चिंतित नहीं होते हैं. यह ठीक वैसा ही है, जैसे बिना मजबूत नींव के ऊंची इमारत खड़ी करना. एक सर्वे के अनुसार, प्राथमिक कक्षा के बच्चे ठीक से पैसे भी नहीं गीन पाते. अंग्रेजी तो फिर भी पराई भाषा हैं, अपनी मातृभाषा भी धाराप्रवाह पढ़ नहीं पाते.
शायद यही वजह हैं कि डिग्री, क्षमता और नौकरी पाने की लालसा के स्तर में भारी असमानता है. रोजगार बहुलता वाले देशों को देखें, तो हम पाते हैं कि वहां प्राथमिक शिक्षा बहुत अच्छी हैं. सरकारों और शिक्षा बोर्डों को इस पर ध्यान देने की जरूरत हैं. उन्हें शिक्षकों की कमी दूर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, ताकि यह भ्रांति दूर हो कि छोटे बच्चों को तो कोई भी पढ़ा लेगा.
सीमा साही, बोकारो

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >