केरल की त्रासदी पर विदेशी मदद के सवाल ने पक्ष – विपक्ष की राजनीति को तेज कर दिया है. राज्य सरकार जहां विदेशी मदद लेने के पक्ष में है, वहीं केंद्र सरकार इसे देश की आत्मनिर्भरता के विरुद्ध मान रही है तथा यह तर्क दे रही है कि इससे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की छवि को नुकसान होगा. इस वक्त केरल अपने इतिहास के सर्वाधिक मुश्किल दौर से गुजर रहा है.
आम जन-जीवन को फिर से पटरी पर लाने के लिए राज्य सरकार ने 2200 करोड़ रुपये की मदद की मांग की है. ऐसे में अगर केंद्र सरकार ने विदेशी मदद लेने से इंकार कर दिया है, तो केंद्र सरकार की यह नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि वह खर्च की भरपाई करे. हालांकि केंद्र सरकार ने 600 करोड़ की मदद की पेशकश की है लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में यह मदद नाकाफी मालूम होती है. केंद्र एवं राज्य सरकारों को अपने मतभेद से ऊपर उठकर भलाई के बारे में सोचना होगा.
मोहम्मद इरफान, वासेपूर, धनबाद
