प्रतिस्पर्धा के इस युग में जिस तेजी से शिक्षा का व्यवसायीकरण हुआ है, उसी रफ्तार से नैतिक मूल्यों का पतन भी हो रहा है. आज शिक्षाविदों द्वारा शिक्षा के साथ नैतिक शिक्षा के समावेशन की वकालत की जा रही है. लेकिन यह भी सच है कि आधुनिकता की आड़ में संस्कार में गिरावट देखी जा रही है. नशायुक्त जीवन से परिपूर्ण व्यक्तित्व को कुछ युवा वर्ग उच्चतम दर्जे की जीवन शैली का नाम दे रहे हैं.
यह उनकी मानसिक विकृतियों की पराकाष्ठा है. हम तकनीकी दुनिया की ओर बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं, जिसमें युवाओं की भागीदारी सराहनीय है. सामाजिक व पारिवारिक मर्यादाओं एवं संस्कारों से परे होकर जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती. इसलिए शिक्षा में नैतिक शिक्षा का होना भी जरूरी है.
एमइएच अंसारी, मधुपुर, देवघर
