बंद से जनता परेशान होती है

बात-बात पर बंद अपने देश व प्रदेश के लिए काफी नुकसानदेह साबित होते जा रहा है. साथ ही साथ निजी और सरकारी संपत्ति का भी नुकसान संभावित है. हर विपक्ष का यह बहुत ही बड़ा हथियार बनता दिख रहा है. सत्ता किसी की भी हो, विपक्ष देश और प्रदेश बंद कराने का मौलिक अधिकार मान […]

बात-बात पर बंद अपने देश व प्रदेश के लिए काफी नुकसानदेह साबित होते जा रहा है. साथ ही साथ निजी और सरकारी संपत्ति का भी नुकसान संभावित है. हर विपक्ष का यह बहुत ही बड़ा हथियार बनता दिख रहा है.
सत्ता किसी की भी हो, विपक्ष देश और प्रदेश बंद कराने का मौलिक अधिकार मान लिया है. बंद की घोषणा से ही परेशान और सरकारी तंत्र बंद से निबटने को व्यस्त हो जाते हैं. इससे विकास का कार्य एकदम-से रुक जाता है.
बंद कराने वाले समझते है कि सरकार को परेशान कर रहे हैं, पर परेशान सीधे तौर पर जनता होती है, स्कूली छात्र होते हैं, सरकारी अस्पतालों पर निर्भर वे मरीज जिनकी दैनिक आय पर जीवन निर्भर करती है, रिक्शावाले, ठेलेवाले, फेरीवाले, बस-ट्रेन के बंद होने पर यात्रियों परेशानी, नरक की अनुभूति दिलाता है. न पानी मिलता है और न खाना मिलता है. विरोध करने के और भी तरीके हैं.
एल शेखर राव, जुगसलाई, जमशेदपुर

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