तेरा चेहरा कितना सुहाना

मुकुल श्रीवास्तव टिप्पणीकार हमारी जवानी के दिनों में एक गाना बहुत हिट हुआ था. फिल्म सलामी का ‘चेहरा क्या देखते हो, दिल में उतर कर देखो न…’ बात एकदम खरी है. दिल और चेहरे का एकदम सीधा संबंध है. ‘लाख छुपाओ छुप न सकेगा राज हो कितना गहरा, दिल की बात बता देता है असली […]

मुकुल श्रीवास्तव

टिप्पणीकार

हमारी जवानी के दिनों में एक गाना बहुत हिट हुआ था. फिल्म सलामी का ‘चेहरा क्या देखते हो, दिल में उतर कर देखो न…’ बात एकदम खरी है. दिल और चेहरे का एकदम सीधा संबंध है. ‘लाख छुपाओ छुप न सकेगा राज हो कितना गहरा, दिल की बात बता देता है असली नकली चेहरा…’ यह भी एक फिल्म का ही गाना है, पर इसमें एक बड़ा फलसफा छुपा हुआ है.

मेरी एक अजीब आदत है. भीड़भाड़ में, सेमिनार में, ट्रेन की यात्राओं में मैं चेहरे मिलाया करता हूं. अगर किसी अपरिचित का चेहरा अपने किसी परिचित से मिलता-जुलता हुआ, तो मैं गिनने लगता हूं कि दोनों की क्या-क्या अदाएं मिलती-जुलती हैं.

ऐसे न जाने कितने अपरिचितों से कभी बात करने की हिम्मत तो नहीं हुई, लेकिन मुझे एक बात तो समझ में जरूर आ गयी कि हर चेहरा कुछ कहता है. रोज हम न जाने कितने चेहरे देखते हैं, लेकिन कभी गौर नहीं करते. असल में चेहरा हमारे व्यक्तित्व का आईना होता है और हर चेहरा बहुत कुछ कहता है. लेकिन हां, अगर हम समझना चाहें तो.

चेहरे से ही हमारी सोच और देहभाषा का पता चलता है, मतलब कि परदे के पीछे क्या चल रहा है. डर से चेहरा काला पड़ जाता है, गुस्से में चेहरा लाल हो जाता है, शर्म से चेहरा गुलाबी हो जाता है और बीमारी में चेहरा पीला पड़ जाता है. ये तो चेहरे के रंग हैं, जो जिंदगी की हलचल को बताते हैं.

पर ये रंग जो चेहरे पर दिखते हैं, वे वास्तविकता में हमारे दिल की भावनाएं होती हैं, जो चेहरे पर दिखती हैं. हम अगर अंदर से अच्छा महसूस कर रहे हैं, तो चेहरे पर खुशी दिखेगी. अगर दुखी हैं, तो चेहरा भावहीन दिखेगा. चेहरे को अच्छा रखना है, तो दिमाग को अच्छा रखना बहुत जरूरी है.

दिमाग को अच्छा रखने का एक मात्र तरीका है कि अपना दिमाग हमेशा खुला रखा जाये और नये विचारों का स्वागत किया जाये. चेहरे की खूबसूरती का राज किसी फेयरनेस क्रीम में नहीं है, बल्कि विचारों के खुलेपन में है. क्योंकि विचार ही तो हमारी आपकी सोच बनाते हैं और सोच ही आम इंसान को खास बनाती है. और अगर आप ऐसा कर पाये, तो लोग कहेंगे कि ‘तेरे चेहरे से नजर नहीं हटती’.

इस छोटे से दिमाग को अगर हम अपनी सकारात्मक सोच से खुला रखेंगे, तो किसी का भी चेहरा निखरेगा ही .जिंदगी में लाख दुख हैं. पीड़ा और चिंताएं हैं. फिर भी जिंदगी खूबसूरत तो है ही न, हर एक के पास जिंदगी को जीने के अपने कारण हैं. सोचिए कि आपका कौन सा काम किसी के चेहरे पर मुस्कान सजा सकता है. किसी को खुश कर सकता है. उस काम की तलाश कीजिए और जिंदगी को खूबसूरत बनाइए.

तो अभी से उस काम की तलाश में लग जाइए और फिर देखिए कि आपका चेहरा भी कैसे दमकेगा. चेहरे की खूबसूरती का राज हमारे पास ही है. खुश रहिए और दूसरों को खुश रखिए. जब आप ऐसा करेंगे, तो लोग अनायास आपको देखकर कह उठेंगे, ‘तेरा चेहरा कितना सुहाना लगता है’.

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