आसान नहीं अच्छे दिन लाना

विगत चुनाव के पहले संभावना थी कि अबकी बार मोदी सरकार. और अंतत: मोदी सरकार आ गयी. अर्थात् देश की जनता ने जाति, पार्टी, क्षेत्र, और धर्म को दरकिनार करके अपनी एकता का परिचय दिया जो बहुत बड़ी बात है. अब सबसे बड़ा और गंभीर प्रश्न है कि अच्छे दिन आने की संभावनाओं का विकल्प […]

विगत चुनाव के पहले संभावना थी कि अबकी बार मोदी सरकार. और अंतत: मोदी सरकार आ गयी. अर्थात् देश की जनता ने जाति, पार्टी, क्षेत्र, और धर्म को दरकिनार करके अपनी एकता का परिचय दिया जो बहुत बड़ी बात है. अब सबसे बड़ा और गंभीर प्रश्न है कि अच्छे दिन आने की संभावनाओं का विकल्प क्या है?

जहां तक मेरा मानना है कि कोई भी दिन बुरा नहीं होता. जब सोच नकारात्मक हो जाती है, तो हर दिन और हर चीज में बुराई नजर आने लगती है. और वही सोच जब सकारात्मक हो, तो सभी दिन अच्छे रहते हैं. अब बारी नरेंद्र मोदी की है. देश की जनता को अच्छे दिन का सपना तो उन्होंने दिखा दिया. अब उन सपनों को सच करने की बारी है. भ्रष्टाचार, काला धन, महिलाओं की सुरक्षा, बढ़ती महंगाई- ऐसे कई मुद्दे हैं, जिन पर मोदी को काफी मशक्कत करनी पड़ेगी.

महाबीर साहू, ई-मेल से

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