सुखाड़ से निबटने की तैयारी करें

मौसम विभाग की इस भविष्यवाणी के बाद सचेत हो जाने की जरूरत है कि इस साल मॉनसून न केवल देर से आयेगा, बल्कि बारिश भी सामान्य से करीब 60 फीसदी कम होगी. यदि यह भविष्यवाणी सच निकली, तो यह लगातार तीसरा वर्ष होगा जब बिहार को सुखाड़ की मार ङोलनी पड़ेगी. मॉनसून को लेकर की […]

मौसम विभाग की इस भविष्यवाणी के बाद सचेत हो जाने की जरूरत है कि इस साल मॉनसून न केवल देर से आयेगा, बल्कि बारिश भी सामान्य से करीब 60 फीसदी कम होगी. यदि यह भविष्यवाणी सच निकली, तो यह लगातार तीसरा वर्ष होगा जब बिहार को सुखाड़ की मार ङोलनी पड़ेगी. मॉनसून को लेकर की गयी भविष्यवाणी के साथ ही चिंता पैदा करने वाली बात यह भी है कि राज्य के दस जिलों में भूगर्भ जल का स्तर नीचे चला गया है.

खास तौर से दक्षिण-पूर्वी जिलों (कैमूर, गया, नवादा, बांका, जमुई आदि) में कई चापाकलों से पानी निकलना बंद हो गया है, क्योंकि भूगर्भ जल का स्तर पांच से सात फुट नीचे खिसका है. इससे भीषण गरमी में पेयजल का संकट उत्पन्न होने की आशंका है. पिछले साल भी बिहार में मॉनसून असामान्य रहा था. एक तो मॉनसून देर से आया और कम अवधि में ज्यादा बारिश हो गयी.

इसका सीधा कुप्रभाव धान की फसल पर पड़ा. ऐसे में जरूरत इस बात की है कि पिछले साल के सुखाड़ से सबक लेते हुए इस साल समय रहते ही इंतजाम पूरे कर लिये जायें. पिछले साल बारिश के अभाव में धान के बिचड़े सूख गये थे, क्योंकि जब तक डीजल सब्सिडी की घोषणा को अमल में लाया गया, देर हो चुकी थी. केंद्र सरकार ने सुखाड़ से उत्पन्न स्थिति और क्षति का जायजा लेने के लिए टीम भेजी थी, लेकिन बिहार को आर्थिक सहायता मिलते-मिलते काफी देर हो गयी. इस कारण यहां के किसानों को समय पर मदद नहीं मिली.

यह सर्वविदित है कि बिहार की खेती का बड़ा हिस्सा मॉनसून पर आश्रित है. सरकारी या निजी नलकूपों की सिंचाई क्षमता काफी कम है. डीजल की कीमत जिस तरह बढ़ी है, वैसे में उसके भरोसे धान की खेती घाटे का सौदा साबित होगा. फिर सुदूर गांवों तक पेयजल उपलब्ध कराना और पशु चारे की व्यवस्था का सवाल भी सामने है. मौसम विभाग ने जब भविष्यवाणी कर दी है, तो इसे सचमुच चेतावनी के रूप में लेने की जरूरत है. हाल ही में कृषि विभाग ने बैठक कर स्थिति की समीक्षा भी की है. लेकिन, सुखाड़ से उत्पन्न होने वाली स्थिति से निबटने के लिए अभी से तमाम तरह के विकल्पों पर विचार कर ठोस फैसला लेने की जरूरत है. बिहार के साथ-साथ झारखंड को भी सुखाड़ से निबटने की तैयारी शुरू करनी चाहिए.

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