प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह अपना दूसरा कार्यकाल संपन्न कर विदा हो रहे हैं. साल की शुरु आत में ही उन्होंने साफ कर दिया था कि अगले पीएम की दौड़ में वे शामिल नहीं हैं. सच कहें तो वे ऐसे विरले राजनेता हैं, जिन्हें लेकर हमेशा एक दुविधा देखी जाती रही है, लेकिन एक व्यक्ति के रूप में शायद ही कोई इस बात से असहमत हो कि वे बेहद सौम्य और ईमानदार हैं.
बतौर पीएम उनकी क्षमताओं को लेकर हमेशा सवाल उठते रहे. कभी उन्हें मजबूर, कभी कमजोर, कभी फैसले न ले पानेवाला, तो कभी रिमोट कंट्रोल से चलनेवाला पीएम कहा गया, लेकिन कमजोरियां हर किसी में होती हैं. सबसे बड़ी बात यह है कि मनमोहन सिंह को किसी बात का कोई मलाल नहीं है. न तो वे कभी सत्ता के लिए आतुर दिखे, न ही अपनी छवि बनाने के लिए बेचैन हुए. अपनी सीमाओं में रह कर उन्होंने अपना सर्वश्रेष्ठ देश को दिया है.
राहुल मिश्र, डाल्टेनगंज
