कुछ दिनों में स्कूल बंद हो जायेंगे. बच्चे गरमी की छुट्टी के मजे लेंगे. लेकिन यह वक्त अभिभावकों के लिए सचेत होने का है. वजह है, जापानी बुखार की आशंका. इस वायरल बुखार से बड़ी तादाद में बच्चे पीड़ित होते हैं. ऐसे कई परिवार हैं, जिनके हंसते-खेलते बच्चे जापानी बुखार की चपेट में आकर अपनों से बहुत दूर चले गये. अब तक इस बीमारी का ज्यादा असर उत्तर बिहार में ही देखा जाता था.
लेकिन चिंता की बात है कि बीते कुछ सालों से इससे पीड़ित बच्चे दक्षिण और मध्य बिहार में भी मिल रहे हैं. पड़ोसी राज्य उत्तरप्रदेश का पूर्वाचल भी जापानी बुखार का एक केंद्र रहा है. बिहार के कई जिले उत्तरप्रदेश की सीमा से सटे हैं. इस लिहाज से सीमावर्ती इलाकों में भी खास सतर्कता बरतने की जरूरत है. पिछले कुछ वर्षो से मुजफ्फरपुर के इलाकों में जापानी बुखार का प्रकोप सामने आया था. फिर गया में भी कई बच्चे इसकी चपेट में आये. इस खतरनाक वायरल की वजह साफ-सफाई का अभाव, खास तरह के मच्छर, और पीने के पानी का शुद्ध नहीं होना है.
गरमी और बरसात के मौसम के संधिकाल में यह बीमारी पसरने लगती है. इस हिसाब से अभिभावकों को खास तौर पर ध्यान देने की जरूरत है कि वे अपने आसपास का वातावरण साफ रखें. सरकारी स्तर पर जो कुछ होना है या हो रहा है, वह अपनी जगह है, अभिभावकों की अपनी भी जिम्मेदारी है कि वे अपने आसपास सफाई का इंतजाम रखें और पानी जमा न होने दें. यही नहीं, बच्चों को शुद्ध पानी मुहैया कराने की कोशिश करें ताकि गरमी बाद जब स्कूल खुले तो वे हंसते-खेलते जा सकें. यह काम सिर्फ इसी मौसम में क्यों हो? यह तो हमारी दिनचर्या में शामिल होने वाली बातें हैं. लेकिन, दिक्कत यह है कि कोई आफत आने पर ही हम सचेत होते हैं.
होना यह चाहिए था कि इन बातों को हम अपनी आदत में शामिल कर लेते. यह भी देखा गया है कि इस बीमारी की चपेट में आनेवाले बच्चे निर्धन परिवारों से हैं. यह अच्छी बात है कि जापानी बुखार की आशंका के मद्देनजर सरकारी अस्पतालों को अलर्ट किया गया है. अस्पतालों में इससे निबटने के इंतजाम के दावे भी किये गये हैं. बहरहाल, स्वास्थ्य विभाग के दावे की परीक्षा की घड़ी भी आने वाली है.
