पंचायत सचिवालय में प्रत्येक गुरुवार को 11 बजे से तीन बजे तक मुखिया सहित पंचायत प्रतिनिधियों की बैठकें होती हैं. शेष दिन पंचायत सचिवालय प्राय: बंद ही देखे जाते हैं. पंचायत सचिवालय में कमरों की कमी नहीं है. यहां की आधारभूत सुविधाओं को और बढ़ाया भी जा सकता है. पंचायत सचिवालय की अपनी गरिमा है. इसे और बढ़ाने और ज्यादा उपयोगी बनाने की जरूरत है, ताकि पंचायती राज व्यवस्था को ज्यादा प्रभावी और उपयोगी बनाया जा सके.
इसके लिए जरूरी है कि पंचायत सचिवालयों में प्रज्ञा केंद्र भी खोले जाएं. इससे पंचायत के जरूरतमंद लोगों को इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा और पंचायत सचिवालय भवन का ज्यादा उपयोग हो सकेगा. पंचायत सचिवालयों में प्रज्ञा केंद्र होने से लोगों को इससे जुड़ी सेवाओं के लिए पैसे खर्च करके पंचायत से बाहर नहीं जाना पड़ेगा. अत: सरकार को प्रज्ञा केंद्र पंचायत सचिवालय में ही संचालित करने पर अविलंब विचार करना चाहिए.
परमेश्वर झा, ईमेल
