कांग्रेस नजरिया बदले

आज कांग्रेस अपने दौर के सबसे बुरे काल से गुजर रही है, लेकिन कांग्रेस के नेता अपने नजरिये में बदलाव लाने को तैयार नहीं है. प्रधानमंत्री पर ‘तू चाय बेच’, ‘चाय वाला’ और ‘नीच’ जैसे शब्दों से व्यक्तिगत टिप्पणियां की जाती है. ऐसा लगता है कि सत्ता से बेदखल होने के बाद विपक्ष में बैठना […]

आज कांग्रेस अपने दौर के सबसे बुरे काल से गुजर रही है, लेकिन कांग्रेस के नेता अपने नजरिये में बदलाव लाने को तैयार नहीं है. प्रधानमंत्री पर ‘तू चाय बेच’, ‘चाय वाला’ और ‘नीच’ जैसे शब्दों से व्यक्तिगत टिप्पणियां की जाती है. ऐसा लगता है कि सत्ता से बेदखल होने के बाद विपक्ष में बैठना जम नहीं रहा. इसलिए बौखलाहट की भाषा बोली जा रही है. प्रधानमंत्री मोदी ने इस्राइल के प्रधानमंत्री को गले लगाया, तो कांग्रेस ने विवादित वीडियो पोस्ट कर दिया. हालांकि कांग्रेस सत्ता पक्ष को घेरने के चक्कर में खुद ही गोल कर बैठ रही है.
प्रधानमंत्री की योजनाओं में कमियां उजागर कर तर्कों के आधार उन्हें घेरना चाहिए, जिससे आदर्श विपक्ष की भूमिका बन सके. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी केवल नसीहत देते हैं. अगर कोई नेता सीमा लांघता है, तो उसपर कार्रवाई का साहस भी उन्हें दिखाना चाहिए.
महेश कुमार, इमेल से

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